मन न मिला तो कैसा नाता

चला अकेला ठोकर खाता,

जितने थे, झूठे वादे थे

सुख पर सभी बिके प्यादे थे,

जाने क्यों मैं समझ न पाया

जग के नियम बड़े सादे थे,

कैसे बताऊ की तू
क्या है मेरे लिए,

उतना ही मैं कुशल हो गया

जितनी असफलताएँ पाईं.

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI

जब पढ़ोगे किताबें,

तो समझोगे कि हमसे पहले…

हमारे जैसे ही हजारों लोग,

हमारी जैसी ही तकलीफों और दुखो से गुजर चुके हैं.

जब पढ़ोगे किताबें तो खुद को अकेला नहीं पाओगे.

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI

कभी मैने किसी को आजमाया ही नहीं,

जितना प्यार दिया उतना प्यार कभी पाया ही नहीं।

किसी को मेरी भी कमी महसूस हो शायद,

खुदा ने मुझे ऐसा बनाया ही नहीं।।

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI

तुम आना मेरी अतिम सांस छूटने से पहले

तुम आना मेरे प्राणों के रूठने से पहले

तुम तब भी आ सकते हो

जब मुझे श्मशान ले जाया जा रहा होगा

तुम तब भी आ सकते हो

जब मुझे चिता पर लिटाया जा रहा होगा

बस तुम छू लेना मुझे जलने से पहले

अग्नि की गोद में पलने से पहले

दे देना मुझे मुक्ति अपनी एक छुअन से

कर देना मुझे मुक्त चिता के धूअन से

तुम आना मेरी आत्मा के उठने से पहले

तुम आना मेरे प्राणों के रूठने से पहले

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI

पत्थर की है ये दुनिया, जज्बात नहीं समझती,

दिल में क्या है, वो ये बात नहीं समझती।

तन्हा वह चांद भी है, सितारों के बीच,

लेकिन चांद का दर्द, बेवफा रात नहीं समझती.

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI

मेरे लिखने से क्या…?

मेरे सोचने से क्या…?

तुम पढ़ो तो, कोई बात बने…!!

तुम समझो तो, कोई बात बने…!!

मैं चुप हूँ तो क्या…?

तुम कुछ बोलो तो, कोई बात बने…!!

मैं फूल हूँ तो क्या…?

तुम खुशबू बनो तो, कोई बात बने…!!

मेरे चाहने से क्या…?

तुम एहसास करो तो, कोई बात बने…!!

मैं बेरंग हूँ तो क्या …?

तुम रंग भरो तो, कोई बात बने…!!

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI

शोर बहुत है मगर सुनाई नहीं देगा,

दर्द दिल का अब चेहरे पर दिखाई नहीं देगा।

एक तुझे बनाने के लिए मैंने बिगाड़ ली सबसे,

सो… मेरे हक में भी कोई गवाही नहीं देगा.

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI

मेरे लिखने से क्या…?

सितारों से भरी हुई रातें पसंद हैं,

दूर से सुनी उसकी बातें पसंद हैं.

तारीफ के काबिल हैं उसके बाल भी पर,

मुझे ज़्यादा उसकी आँखें पसंद हैं.

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI

अगर वो पूछ लें हमसे,

तुम्हें किस बात का गम है.

तो फिर किस बात का गम है,

अगर वो पूछ लें हमसे.

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI

बहुत सोच कर सोचा है,

किनारा कर लिया जाए.

अब तेरी यादों से ही,

गुजारा कर लिया जाए.

एक वक्त था,

जब अजनबी थे हम दोनों.

वही हाल अब फिर से,

दोबारा कर लिया जाए.

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI

वो नाराज रहते हैं हमसे,

हमारी बात नहीं होती,

पर वो ये नहीं जानते कि,

बात न होने से,

किसी की याद कम नहीं होती.

SAD

Alfaz Yatra

SHAYARI