ये जो आँखें है तुम्हारी
क्या राज छुपाई है
जानना चाहती हूँ मैं
क्या इसने कभी मेरे लिए आंसू बहाई है
तेरी आँखों में ये जो मासूमियत है
ना जाने कितनी बार मेरा दिल चुराई है
हर रोज सोचती हु पढ़ लिया होता
उन आँखों को और एक बार
क्यूंकि हर दफा उसमे मैंने
अपने लिए ही मोहब्बत पायी है